अर्जुन ने निराश न होते हुए कहा, "क्या हम छोटे नहीं हैं? लेकिन चींटियाँ मिलकर शेर को मार देती हैं। हम बौने सैनिक बनेंगे!"

गाँव के युवा बहादुर थे, लेकिन दुर्गासुर इतना विशाल था कि उसकी एक ठोकर से पूरी सेना लोट जाती। राजा ने हार मान ली थी।

एक दिन, गाँव के सरपंच के बेटे 'अर्जुन' ने सभा में कहा, "हमें इस राक्षस का अंत करना होगा।"

लेकिन अर्जुन ने कहा, "छोटे होना बुरा नहीं है, दुर्गासुर। बुरा है अकेले बड़ा होना और दूसरों को सताना। हमारी ताकत एकता में है!"

यहाँ "छोटे सैनिक" (Small Soldiers) विषय पर एक मौलिक प्रेरणादायक कहानी है:

अर्जुन ने इशारा किया। सबसे तेज़ लड़के 'भागो' ने राक्षस के पैर में बिच्छू डंक मार दिया। दुर्गासुर "हुआं!" करके उठा तो उसका पैर लकड़बग्घे के जाल में फँस गया। जैसे ही वह झुका, ऊपर से 10 लड़कों ने मिलकर एक विशाल पेड़ की डाल तोड़कर उसके सिर पर गिरा दी। दुर्गासुर लड़खड़ाया - तभी दूसरे समूह ने उसके हाथों को रस्सियों से बाँध दिया।