The Babadook Hindi Official
हिंदी सिनेमा में अक्सर हॉरर का मतलब चुड़ैल, शैतान या जिन्न होता है। लेकिन द बाबादूक एक अलग लेवल की हॉरर है—यह हमारे अपने मन का डर है। फिल्म का मुख्य संदेश यही है कि जिस दर्द या मानसिक बीमारी को हम नकारते हैं, वही एक राक्षस का रूप लेकर हमारे सामने आ जाती है।
एक रात, सैम को शेल्फ पर एक अजीब पॉप-अप बुक मिलती है, जिसका नाम है । यह किताब किसी लेखक का नाम लिए बिना वहां रखी थी। जैसे ही वे किताब पढ़ते हैं, उसमें लिखी डरावनी कविताएं और चित्र जीवंत होने लगते हैं। किताब के अनुसार, "बाबादूक" एक अंधेरी आत्मा है जो उसे पढ़ने वाले के घर में आ जाती है और उसे तब तक नहीं छोड़ती, जब तक वह व्यक्ति उसे नष्ट न कर दे या खुद ही उसके जैसा न बन जाए। the babadook hindi
2014 में आई ऑस्ट्रेलियाई हॉरर फिल्म द बाबादूक (The Babadook) ने दुनिया भर के दर्शकों को परेशान कर दिया। यह फिल्म आम जंप स्केयर (अचानक डराने वाले दृश्य) वाली हॉरर फिल्मों की तरह नहीं है। बल्कि, यह एक मां और उसके बेटे के बीच के रिश्ते, दुख (ग्रीफ), और अवसाद (डिप्रेशन) की डार्क साइड को बेहद ही यथार्थवादी और डरावने ढंग से पेश करती है। हिंदी दर्शकों के लिए यह फिल्म इसलिए खास है क्योंकि यह मानसिक स्वास्थ्य के उस पहलू को छूती है, जिसके बारे में अक्सर घरों में बात नहीं की जाती। वह रोती नहीं
निर्देशक जेनिफर केंट ने इस फिल्म को बेहद ही मिनिमलिस्टिक (साधारण) सेटअप में बनाया है। बिना ढेर सारे वीएफएक्स के, सिर्फ लाइट और साउंड का उपयोग करके उन्होंने एक डरावना माहौल खड़ा किया है। एस्सी डेविस का अभिनय अद्वितीय है। एक मां के रूप में जहां वह अपने बेटे को प्यार करती है, वहीं उसके प्रति उसकी थकान और चिड़चिड़ापन देखते ही बनता है। किसी से बात नहीं करती
अगर हम इस फिल्म को भारतीय परिवारों के संदर्भ में देखें, तो यह और भी प्रासंगिक हो जाती है। हमारे समाज में, खासकर महिलाओं पर यह दबाव होता है कि वे हर परिस्थिति में "मजबूत" रहें। एक विधवा मां पर यह दबाव दोगुना हो जाता है। अमीलिया अपने दुख को दबाए रखती है, वह रोती नहीं, किसी से बात नहीं करती, और इसी को दबाने की कोशिश में उसके अंदर का बाबादूक (गुस्सा, निराशा, आत्म-विनाश) बड़ा होता जाता है।
धीरे-धीरे, अमीलिया को घर में अजीब आवाजें, दस्तकें और परछाइयां दिखाई देने लगती हैं। सैम परेशान होकर हथियार बनाने लगता है। अमीलिया इसे सब सैम की कल्पना मानकर नजरअंदाज करती है, लेकिन जल्द ही उसे पता चलता है कि बाबादूक असली है। असली खौफ तब शुरू होता है जब अमीलिया को एहसास होता है कि बाबादूक बाहर से नहीं, बल्कि उसके अंदर ही पनप रहा है।